जापानी भाषा को लिखने की लिपि कितनी होती है?
जापानी भाषा को लिखने की लिपि कितनी होती है?
जिसका जवाब है 1. हिरागाना 2. काताकाना 3. कांजी
1. हिरागाना: इस लिखावट का आविष्कार जापानी इतिहास के हेइआन सदी में हुआ। ऐसा माना जाता है। जिस समय जब राजा लोग युद्ध लड़ने महल छोड़ देते थे तब उनकी रानियाँ तरह तरह के गद्य और पद्य की संरचनायें किया करती थीं। चूंकि हिरागाना का स्त्रोत चीनी भाषा की लिपि जिसे कांजी भी कहते हैं उससे हुआ है इसलिए जापानी साहित्य भी शुरुआती दौर मे कांजी में ही लिखी जाती थीं। लेकिन धीरे धीरे इसका सरलीकरण होता गया और जापानी भाषा को लिखने का आसान तरीका “हिरागाना” के रूप में आया। इसको जापानी लोगों की मूल लिपि भी कही जाती है। इनकी अगर पहचान करनी हो ये लिपि लिखे गए शब्द गोलाकार, गुमाउदार लगते हैं।
जैसे: あ い う え お अ इ उ ए ओ
जापानी भाषा में हिरागाना के वर्णों की कुल संख्या 46 है।
2: काताकाना: ये लिपि जापानी भाषा में विदेश की किसी भाषा से लिये गए शब्दों को दर्शाने के लिये उपयोग किया जाता है। हांलाकि विदेशी भाषा से उधार लिये गए शब्द को ज्यों का त्यों ही नहीं लिया जाता बल्कि इसका जापानीकरण के उपरांत ही लिया जाता है। ये शब्द जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन, अंग्रेजी इत्यादि से लिए गए हैं। इनकी भी 46 संख्या होती है। उच्चारण भी हिरागाना जैसा ही रहता है। इनका आकार कोन जैसा रहता है। तिकोनाकार के ये वर्ण अगर हिरागाना से तुलना करें तो हिरगाना के सरल प्रतिबिंब के विपरीत ये तीखे कोने (sharp edges) से प्रतीत होते हैं।
3. कांजी: कांजी लिपि मूलतः चीन देश की लिपि मानी जाती है जोकि चीन से कोरिया होते हुए जापान पहुंचा ऐसा कहा जाता है। जिसकी वजह से जापानी भाषा के शुरुआती साहित्य कांजी लिपि में लिखे पाये जातें हैं। ये सबसे ज्यादा पेंचीदा लिपि है। जिसको लिखना और याद करना आसान नहीं होता है। इसकी लिखावट में महारत हासिल करने में काफी मेहनत लगती है। ये लिपि चीजों का चित्रित सार होती हैं। जैसे: 月= त्सुकी=tuski= चाँद। अगर कांजी के इस आकार को ध्यान दें तो ये एक कटा हुआ चाँद सा प्रतीत होता है। चूंकि कांजी चीनी लिपि है इसलिये चीन देश में उपयोग होने वाले कांजी और जापान में उपयोग होने वाले कांजी काफी मिलते जुलते हैं। लेकिन फिर भी ये भी जापानीकरण के कारण जापानी भाषा में उपयोग होने वाले कांजी की संख्या निश्चित है। वो कांजी जो साधारण हर जगह उपयोग किया जाता है उनको जोयो कांजी कहते हैं। इनकी संख्या 2,136 है। (2010 के डेटा के हिसाब से)
जिसका जवाब है 1. हिरागाना 2. काताकाना 3. कांजी
1. हिरागाना: इस लिखावट का आविष्कार जापानी इतिहास के हेइआन सदी में हुआ। ऐसा माना जाता है। जिस समय जब राजा लोग युद्ध लड़ने महल छोड़ देते थे तब उनकी रानियाँ तरह तरह के गद्य और पद्य की संरचनायें किया करती थीं। चूंकि हिरागाना का स्त्रोत चीनी भाषा की लिपि जिसे कांजी भी कहते हैं उससे हुआ है इसलिए जापानी साहित्य भी शुरुआती दौर मे कांजी में ही लिखी जाती थीं। लेकिन धीरे धीरे इसका सरलीकरण होता गया और जापानी भाषा को लिखने का आसान तरीका “हिरागाना” के रूप में आया। इसको जापानी लोगों की मूल लिपि भी कही जाती है। इनकी अगर पहचान करनी हो ये लिपि लिखे गए शब्द गोलाकार, गुमाउदार लगते हैं।
जैसे: あ い う え お अ इ उ ए ओ
जापानी भाषा में हिरागाना के वर्णों की कुल संख्या 46 है।
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| हिरागाना चार्ट |
2: काताकाना: ये लिपि जापानी भाषा में विदेश की किसी भाषा से लिये गए शब्दों को दर्शाने के लिये उपयोग किया जाता है। हांलाकि विदेशी भाषा से उधार लिये गए शब्द को ज्यों का त्यों ही नहीं लिया जाता बल्कि इसका जापानीकरण के उपरांत ही लिया जाता है। ये शब्द जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन, अंग्रेजी इत्यादि से लिए गए हैं। इनकी भी 46 संख्या होती है। उच्चारण भी हिरागाना जैसा ही रहता है। इनका आकार कोन जैसा रहता है। तिकोनाकार के ये वर्ण अगर हिरागाना से तुलना करें तो हिरगाना के सरल प्रतिबिंब के विपरीत ये तीखे कोने (sharp edges) से प्रतीत होते हैं।
जैसे:ア イ ウ エ オ अ इ उ ए ओ
इनका उपयोग विदेशी व्यक्ति के नामों को लिखने के लिए भी किया जाता है। और कभी कभी हिरागाना के शब्द को काताकाना में लिखा जाता है ताकि उसमें छिपे भाव को विशेष रूप से प्रकट किया जा सके। जैसे: だめ (हिरागाना)、ダメ(काताकाना)= दामें का मतलब होता है “मत करो” किसी गलत हो रहे काम के प्रति अपना विरोध प्रकट करने के लिए उपयोग करते हैं। और जब इसे काताकाना में उपयोग करते हैं तो ये अर्थ तो समान रहता है लेकिन भाव में और ज्यादा प्रभाव रहता है। तो मोटामोटी किसी चीज पर जब जोर लगाकर बोला जाता है तो हिरागाना के शब्दों को भी काताकाना में कर दिया जाता है।
3. कांजी: कांजी लिपि मूलतः चीन देश की लिपि मानी जाती है जोकि चीन से कोरिया होते हुए जापान पहुंचा ऐसा कहा जाता है। जिसकी वजह से जापानी भाषा के शुरुआती साहित्य कांजी लिपि में लिखे पाये जातें हैं। ये सबसे ज्यादा पेंचीदा लिपि है। जिसको लिखना और याद करना आसान नहीं होता है। इसकी लिखावट में महारत हासिल करने में काफी मेहनत लगती है। ये लिपि चीजों का चित्रित सार होती हैं। जैसे: 月= त्सुकी=tuski= चाँद। अगर कांजी के इस आकार को ध्यान दें तो ये एक कटा हुआ चाँद सा प्रतीत होता है। चूंकि कांजी चीनी लिपि है इसलिये चीन देश में उपयोग होने वाले कांजी और जापान में उपयोग होने वाले कांजी काफी मिलते जुलते हैं। लेकिन फिर भी ये भी जापानीकरण के कारण जापानी भाषा में उपयोग होने वाले कांजी की संख्या निश्चित है। वो कांजी जो साधारण हर जगह उपयोग किया जाता है उनको जोयो कांजी कहते हैं। इनकी संख्या 2,136 है। (2010 के डेटा के हिसाब से)



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