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AI ke jamane me Japanese Language ka future?

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AI Image Namskaar! Kaisi chal rhi Japanese ki padhaai? aaj ek imaandaari se baat karna chahunga. Kya lagta hai is AI ke time kewal Japanese ka knowledge hona aapka career bna skta hai? Agar aap career ke ek agle padao pe aana chah rhe ho? Main bhi abhi isi confusion me hoon. Apane career ko aage kaise shape or level up karun? Smjh nahi aa rha. Abhi ke career se money to aa rha hai but self satisfaction nahi aa rha hai. Aage career ko kis roop me dhaalun jisme meri ek expert level bhi ho. Agar main khud ke language level ki baat karun to kuch as such master level to nahi hai. Bas theek thaak bol leta hoon and read kar leta hai aur listening bhi OK hai. Writing aisa area hai jahan mujhe struggle karna padta hai. Main apane Language ke level ko lekar bhi ek confusion wale state me hoon aur usse jaayeda AAGE KYA? Wala question hamesha mere dimaang me kaundhta rhega. By the way: Maine kuch step to liye hain- 1. Udemy pe techinical knowledge- like C language, What is SAP etc. 2. Japanese new...

सपनों का पूल! Yume no Tusribashi! Hanging Bridge of Dream!

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 तो दोस्तों जैसा की पिछली वाली कड़ी में आपको बताया कि मैं पहुँच गया था Shizuoka Prefecture के Yume no Tsuribashi के पास. उसी की कड़ी की यात्रा का विवरण अब आगे.  ये है Starting Point Yume no Tsuribashi के पास जाने के लिए. यहाँ से आपको पैदल ही जाना होता है.  ये है मानचित्र मंजिल पहुँचने के लिए.  एक चेतावनी कि अँधेरा होने से पहले ही वापिस आ जाए क्यूंकि वहां लाइट की व्यवस्था नहीं सड़कों पर. प्रकृति का ऐसा खूबसूरत नज़ारा। वाह! लगभग पैदल चलते हुए 20 से 30 मिनट लगते हैं मंजिल तक पहुँचने में और हमें इस गुफा को भी पार करना पड़ता है. ये मेहनत काम आती है और आपको दिख जाता है शानदार सपनों का पूल.  एक और विहंगम नज़ारा सपनों के पूल का.  वापसी में मैंने खाई जापानी Udon. बहुत ही स्वादिष्ट था.  तो ये थी मेरी यात्रा सपनों के पूल की. धन्यवाद। 

सपनों का पूल! Suspension Bridge of Dreams! Yume no Tsuribashi | Japan in Spring 2022 | Part 1

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 दिनाँक १२ मार्च  २०२२ दिन शनिवार दोस्तों आजकल मैं जापान के शिज़ुओका राज्य के हमामात्सु शहर में  रहता हूँ. आज मैं आपको ले जाने वाला हूँ बेहद ही खबसूरत जन्नंत से कोई कम नहीं जगह पर. शिज़ुओका राज्य में स्थित सपनों का झूमता पूल. कहा जाता है कि इस पूल पर अगर आप कोई मन्नत मांगते हैं तो वो जरूर पूरी होती है.  तो मैं आज हमामात्सु के JR स्टेशन से सबेरे 7 :45 को कनाया स्टेशन तक की यात्रा 770 येन में की.   लगभग आधे घंटे के सफर के बाद मैं पहुंचा कनाया स्टेशन।  JR Kanaya Station इसी स्टेशन का बगल में सटा हुआ छोटा सा रेलवे स्टेशन है जिसका नाम Oigawa Railway Station.  Oigawa Railway Station चूँकि Oigawa Railway एक अलग कंपनी है तो आपको इसके लिए अलग से टिकट लेना होता है. इसके अगले प्लेटफार्म से जिसका नाम Shin Kanaya Station है वहां से प्रसिद्ध भाप इंजन वाली ट्रैन, थॉमस टॉय ट्रैन भी चलती है जिनका समय सारिणी Oigawa Railway के वेबसाइट से चेक किया जा सकता है.  तो मैं बात कर रहा था अपने यात्रा की. मैंने यहाँ से 1840 येन की एक तरफ जाने की टिकट खरीदी। लेकिन वापिसी क...

अबकी बार जापान !

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दोस्तों तो मैं जापान आ ही गया आख़िर।   लम्बे समय का इंतज़ार खतम हुआ और मैं 28 नवम्बर 2021 को जापान पहुँच ही गया। इस बार कोरोना के चलते चीज़ इतनी आसान भी नहीं थीं लेकिन किसी तरीक़े से वीज़ा हासिल किया फिर भी उसके तीन महीने होने तक भी जापान जाने का टिकट नहीं मिल रहा था लेकिन आख़िरी हफ़्ते में सब कुछ हो ही गयाऔर मैं बहुत ही लकी था क्यूँकि अगले ही दिन जापान सरकार ने कोरोना के नये प्रकार ओमिक्रोन के चलते विदेशी लोगों का जापान आने पर रोक लगा दिया। आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि जापान की यात्रा के लिए इस कोरोना काल में वीज़ा , टिकट और पासपोर्ट के अलावा क्या क्या चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है। हालाँकि मेरे द्वारा यहाँ दी गयी जानकारी में बदलाव की संभावना रहेगी क्यूँकि कोरोना के प्रकार में भी बदलाव होता जा रहा है। 1- कोरोना का नेगेटिव रिपोर्ट : यात्रा के समय के 72 घंटे के भीतर जाँच किया हुआ कोरोना का नेगेटिव रिपोर्ट और जापान सरकार द्...

जापानी भाषा को लिखने की लिपि कितनी होती है?

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जापानी भाषा को लिखने की लिपि कितनी होती है? जिसका जवाब है 1. हिरागाना 2. काताकाना 3. कांजी  1. हिरागाना:  इस लिखावट का आविष्कार जापानी इतिहास के हेइआन सदी में हुआ। ऐसा माना जाता है। जिस समय जब राजा लोग युद्ध लड़ने महल छोड़ देते थे तब उनकी रानियाँ तरह तरह के गद्य और पद्य की संरचनायें किया करती थीं। चूंकि हिरागाना का स्त्रोत चीनी भाषा की लिपि जिसे कांजी भी कहते हैं उससे हुआ है इसलिए जापानी साहित्य भी शुरुआती दौर मे कांजी में ही लिखी जाती थीं। लेकिन धीरे धीरे इसका सरलीकरण होता गया और जापानी भाषा को लिखने का आसान तरीका “हिरागाना” के रूप में आया। इसको जापानी लोगों की मूल लिपि भी कही जाती है। इनकी अगर पहचान करनी हो ये लिपि लिखे गए शब्द गोलाकार, गुमाउदार लगते हैं।  जैसे:  あ い う え お   अ इ उ ए ओ  जापानी भाषा में हिरागाना के वर्णों की कुल संख्या 46 है।  हिरागाना चार्ट  2: काताकाना:  ये लिपि जापानी भाषा में विदेश की किसी भाषा से लिये गए शब्दों को दर्शाने के लिये उपयोग किया जाता है। हांलाकि विदेशी भाषा से उधार लिये गए शब्द को ज्यों का त्यों ही नहीं लिया जा...

मेरी जापान यात्रा: कड़ी 2: बस के अन्दर भस‍‍‍ड़

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पिछली कड़ी में मैं जापान की धरती पे पधार गया था. और नारिता हवाई अड्डे पे अपने वियतनाम से आये मित्रों से भेंट हुई. उन्होंने लाल रंग के टी शर्ट के बीच पीले रंग के चमचमाते तारा वाले पोशाक को पहने हुए थे. (वियतनाम का राष्ट्रीय ध्वज़) इसी बीच पंकज जी ने जापानी भाषा में अपना परिचय एक वियतनामी बहन को देने की कोशिश की. लेकिन शायद बहन जी को पंकज जी की भाषा नहीं बूझी थी. और पंकज जी का सार्थक प्रयास इन बहन जी पर निरर्थक हो गया. चलिए फिर हमने कूच किया बस की तरफ़. वियतनाम के भईया और बहेने शान्ति का परिचय देते हुए बस के आगे की गद्दियों में अपनी तशरीफ़ जमा ली और ज्यादतर लोग निद्रामग्न हो गये. किन्तु हम भारत से आये 10 लोगों का जत्था परम उत्साहित था. बस के सबसे पिछली गद्दियों में अपने को जमाया और खिडकियों से जापान का नज़ारा लिया जाने लगा. और हाँ! हमने पहली बार बस की गद्दियों में भी सीट बेल्ट का अस्तित्व पाया. हमारे को लेने आयी मैडम जी ने पहले से ही इत्तला किया की कृपया अपनी सीट बेल्ट बांध लें. लेकिन ऐसा करना हम लोगों को मंजूर नहीं था. क्योंकि जापान पहुंचने की उत्साह हमें बस की गद्दियों पे ...

मेरी जापान यात्रा: कड़ी 1: मेरी पहली हवाई यात्रा

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 जापान, एक खुबसूरत, सुन्दर देश है. ये मेरी पहली जापान यात्रा थी. और ये पहली छाप जापान की. जापानी भाषा से जापान और जापानी संस्कृति को और करीब से जानने की इच्छा बढ़ती ही जा रही थी जोकि जापान जाने की जरुरत को बयां कर रही थी. हालांकि इस मौके को भुनाने में चार साल लग गये. और मुझे आखिरकार JENESYS2016 प्रोग्राम द्वारा जापान जाने का मौका मिला. ये प्रोग्राम 8नवम्बर से 15नवम्बर तक का था. हालांकि 7 दिनों के इतने कम समय में जो कुछ किया, वह हमेशा सीखने लायक और याद रहेगा. इस यादगार सफर में भारत से शान्ति दूत की पहली खेप में 10 लोग थे. जिसमें बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पांच लोग और दिल्ली विश्वविद्यालय से पांच थे.  चूंकि ये शान्ति यात्रा थी इसलिये हमारा हिरोशिमा या नागासाकी जाना लाजिमी था. मैंने हिरोशिमा जाने के सपने देखना शुरू कर दिया था. लेकिन नसीब ने मुझे नागासाकी पहुंचा दिया. एक माह पूर्व ही हमें इसकी जानकारी मिली और एक माह से न जाने कितनी तैयारियां होने लगी थी. सपनों में जापान, जागते हुए भी जापान. जापान जापान और बस जापान. सारे दूसरे कामों को तिलांजलि देकर बस सपनों के जहा...